रूसी क्रांति

सन 1917 की रूस की क्रांति विश्व इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है। इसके परिणामस्वरूप रूस से ज़ार के स्वेच्छाचारी शासन का अन्त हुआ तथा रूसी सोवियत संघात्मक समाजवादी गणराज्य की स्थापना हुई। यह क्रान्ति दो भागों में हुई थी – मार्च 1917 में, तथा अक्टूबर 1917 में। पहली क्रांति के फलस्वरूप सम्राट को पद-त्याग के लिये विवश होना पड़ा तथा एक अस्थायी सरकार बनी। अक्टूबर की क्रान्ति के फलस्वरूप अस्थायी सरकार को हटाकर बोलसेविक सरकार (कम्युनिस्ट सरकार) की स्थापना की गयी। 1917 की रूसी क्रांति बीसवीं…

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पुनर्जागरण

पुनर्जागरण (Renaissance) का शाब्दिक अर्थ होता है, “फिर से जागना”। 14वीं और 16वीं सदी के बीच यूरोप में जो सांस्कृतिक व धार्मिक प्रगति, आंदोलन तथा युद्ध हुए उन्हें ही पुनर्जागरण कहा जाता है। इसके फलस्वरूप जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में नवीन चेतना आई। यह आन्दोलन केवल पुराने ज्ञान के उद्धार तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इस युग में कला, साहित्य और विज्ञान के क्षेत्र में नवीन प्रयोग हुए। नए अनुसंधान हुए और ज्ञान-प्राप्ति के नए-नए तरीके खोज निकाले गए। इसने परलोकवाद और धर्मवाद के स्थान पर मानववाद को प्रतिष्ठित किया। पुनर्जागरण वह…

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भारतीय संविधान की मूल संरचना

संविधान, संसद और राज्य विधान मंडलों या विधानसभाओं को उनके संबंधित क्षेत्राधिकार के भीतर कानून बनाने का अधिकार देता है। संविधान में संशोधन करने के लिए बिल संसद में ही पेश किया जा सकता है, लेकिन यह शक्ति पूर्ण नहीं है। यदि सुप्रीम कोर्ट को लगता है कि संसद द्वारा बनाया गया कानून संविधान के साथ न्यायसंगत नहीं है तो उसके पास (सुप्रीम कोर्ट) इसे अमान्य घोषित करने की शक्ति है। इस प्रकार, मूल संविधान के आदर्शों और दर्शनों की रक्षा करने के लिए, सुप्रीम कोर्ट ने बुनियादी संरचना सिद्धांत…

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पहला विश्व युद्ध

पहला विश्व युद्ध 1914 से 1918 तक मुख्य तौर पर यूरोप में व्याप्त महायुद्ध को कहते हैं। यह महायुद्ध यूरोप, एशिया व अफ्रीका तीन महाद्वीपों और समुद्र, धरती और आकाश में लड़ा गया। इसमें भाग लेने वाले देशों की संख्या, इसका क्षेत्र (जिसमें यह लड़ा गया) तथा इससे हुई क्षति के अभूतपूर्व आंकड़ों के कारण ही इसे विश्व युद्ध कहते हैं। यह युद्ध लगभग 52 माह तक चला और उस समय की पीढ़ी के लिए यह जीवन की दृष्टि बदल देने वाला अनुभव था। करीब आधी दुनिया हिंसा की चपेट…

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महारत्न कंपनी

भारत की 10 प्रमुख महारत्न कंपनियां इस प्रकार है (2019 तक)- Bharat Heavy Electricals Limited Coal India Limited GAIL (India) Limited Indian Oil Corporation Limited NTPC Limited Oil & Natural Gas Corporation Limited Steel Authority of India Limited Bharat Petroleum Corporation Limited  Power Grid Corporation of India Limited Hindustan Petroleum Corporation Limited

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आकाशीय पिंड (Celestial Bodies), तारे

आकाशीय पिंड (Celestial Bodies) – आकाश गंगा या मन्दाकिनी तारों का एक विशाल पुंज है। अन्तरिक्ष में 10000 मिलियन (1010) आकाश गंगायें हैं। प्रत्येक आकाश गंगा में 100000 मिलियन (1011) तारे हैं। तारों के अतिरिक्त आकाश गंगा में धूल और गैस पाई जाती है। – निहारिका अत्यधिक प्रकाशमान आकाशीय पिंड है, जो गैस और धुल के कणों से मिलकर बना है। – तारामंडल तारों का एक समूह है, इस समय 89 तरमंदलों की पहचान की गयी है। इसमें हाइड्रा सबसे बड़ा है, जैसे – ग्रेट बियर, काल पुरुष आदि तारामंडल…

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देश में बड़े-बड़े नौ अकाल

ब्रिटिश राज्यकाल के पहले के अकालों का विश्वस्त विवरण प्राप्त नहीं होता है लेकिन 1757 ई. की प्लासी की लड़ाई और 1947 ई. में भारत की स्वाधीनता मिलने के समय के बीच, अर्थात् 190 वर्ष की छोटी अवधि के दौरान देश में बड़े-बड़े नौ अकाल पड़े। Note : इतिहास में सबसे भयंकर था बंगाल का अकाल (सन 1942-43) जिसमें 15 लाख व्यक्ति मरे।1769-70 ई., जिसमें बंगाल, बिहार और उड़ीसा की एक तिहाई आबादी नष्ट हो गई।   1837-38 ई. में समस्त उत्तरी भारत अकालग्रस्त हुआ, जिसमें 8 लाख व्यक्ति मौत…

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तीनकठिया खेती, चम्पारण सत्याग्रह -भारतीय स्वतंत्रता इतिहास में गाँधीजी के सत्याग्रह का यह पहला प्रयोग

तीनकठिया खेती – तीनकठिया खेती अंग्रेज मालिकों द्वारा बिहार के चंपारण जिले के रैयतों (किसानों) पर नील की खेती के लिए जबरन लागू तीन तरीकों मे एक था। खेती का अन्य दो तरीका ‘कुरतौली’ और ‘कुश्की’ कहलाता था। तीनकठिया खेती में प्रति बीघा (२० कट्ठा) तीन कट्ठा जोत पर नील की खेती करना अनिवार्य बनाया गया था। 1860 के आसपास नीलहे फैक्ट्री मालिक द्वारा नील की खेती के लिए ५ कट्ठा खेत तय किया गया था जो 1867 तक तीन कट्ठा या तीनकठिया तरीके में बदल गया। इस प्रकार फसल…

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रैयतवाड़ी व्यवस्था और महालवाड़ी व्यवस्था

रैयतवाड़ी व्यवस्था व्यवस्था में प्रत्येक पंजीकृत भूमिदार भूमि का स्वामी होता था, जो सरकार को लगान देने के लिए उत्तरदायी होता था। भूमिदार के पास भूमि को रहने, रखने व बेचने का अधिकार होता था। -भूमि कर न देने की स्थिति में भूमिदार को, भूस्वामित्व के अधिकार से वंचित होना पड़ता था। -इस व्यवस्था के अंतर्गत सरकार का रैयत से सीधा सम्पर्क होता था। –रैयतवाड़ी व्यवस्था को मद्रास तथा बम्बई (वर्तमान मुम्बई) एवं असम के अधिकांश भागों में लागू किया गया। –रैयतवाड़ी भूमि कर व्यवस्था को पहली बार 1792 ई.…

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स्थाई बन्दोबस्त (Permanent Settlement) या ज़मींदारी प्रथा, इस व्यवस्था को जागीरदारी, मालगुज़ारी व बीसवेदारी क्या है?

स्थाई बन्दोबस्त (Permanent Settlement) या ज़मींदारी प्रथा, इस व्यवस्था को जागीरदारी, मालगुज़ारी व बीसवेदारी के नाम से भी जाना जाता था। इस व्यवस्था के लागू किए जाने से पूर्व ब्रिटिश सरकार के समक्ष यह समस्या थी कि भारत में कृषि योग्य भूमि का मालिक किसे माना जाए, सरकार राजस्व चुकाने के लिए अन्तिम रूप से किसे उत्तरदायी बनाये तथा उपज में से सरकार का हिस्सा कितना हो। लॉर्ड कार्नवालिस का शासनकाल अपने प्रशानिक सुधारों के लिए हमेशा याद किया जायेगा. उसने साम्राज्य विस्तार की और अधिक ध्यान न देकर आंतरिक सुधारों…

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