Biology/जीव विज्ञान

जीव विज्ञान, प्राकृतिक विज्ञान की तीन विशाल शाखाओं में से एक है। यह विज्ञान जीव, जीवन और जीवन के प्रकृया से सम्बन्धित है। इस विज्ञान में पेड़-पौधों और जानवरों के अभ्युदय, इतिहास, भौतिक गुण, जैविक प्रक्रम, कोशिका, आदत, इत्यादि का अध्ययन किया जाता है। जीव विज्ञान शब्द का प्रयोग सबसे पहले लैमार्क और ट्रविरेनस नाम के वैज्ञानिको ने 1802ई० मे किया। विज्ञान कि वह शाखा जो जीवधारियों से सम्बन्धित है, जीवविज्ञान कहलती है।

जिन वस्तुओं की उत्पत्ति किसी विशेष अकृत्रिम जातीय प्रक्रिया के फलस्वरूप होती है, जीव कहलाती हैँ। इनका एक परिमित जीवनचक्र होता है। हम सभी जीव हैँ।

जीवों में कुछ मौलिक प्रक्रियाऐं होती हैं:-

जीवों के गुण

श्वसन Respiration- श्वसन इनका मुख्य लक्षण है। इसमें जीव वायुमण्डल से आक्सीजन ग्रहण करता है तथा कार्बन डाईआक्साइड बाहर निकालता है। श्वसन क्रिया द्वारा वसा, कार्बोहाइड्रेट तथा प्रोटीन के विघटन से ऊर्जा प्राप्त होती है। जिससे समस्त जैविक क्रियाएँ संचालित होती है।

पोषण Nutrition-

जीवन के विकास तथा ऊर्जा उत्पादन हेतु पोषण आवश्यक है। पौधे प्रकाश संश्लेषण द्वारा तथा जन्तु पौधों द्वारा पोषण प्राप्त करते हैं।

प्रजनन Reproduction-

प्रजनन द्वारा प्रत्येक जीव अपने जैसा ही जीव पैदा कर अपने वंश परम्परा को बनाये रखता है।

अनुकूलन Adaptation-

जीवन संघर्ष में सफल होने के लिए जीव अपनी संरचना एवं कार्यिकी में परिवर्तन कर अपने अस्तित्व को बचाते हैं।

गति /Movementor Locomotion-जीवधारियों में जन्तु एक स्थान से दूसरे स्थान को गति करते हैं, जबकि पौधे स्थिर रहकर अपने अंगों को गतिशील रखते हैं।

संवेदनशीलता/Sensitivity-वातावरण में होने वाले परिवर्तन को जीवधारी अनुभव करते हैं और आवश्यकतानुरुप अपने अन्दर परिवर्तन भी करते हैं। यह परिवर्तन ही अनुकूलन कहलाता है।

उपापचय Metabolism-जीवों में उपापचय क्रिया होती है, जिसमें उपचय में रचनात्मक क्रियाएं तथा अपचय में अपघटन की क्रियाएं होती हैं।

जीवन चक्र Life Cycle-जीवधारियों में सभी जैविक क्रियाएं निश्चित समय पर होती हैं और एक निश्चित अन्तराल के पश्चात् वह नष्ट हो जाता है।

जीवद्रव्य Protoplasm- जीवधारियों में उपस्थित वास्तविक जीवित पदार्थ है। यह जीवों की भौतिक आधारशिला है।

वृद्धि Growth- जीवधारियों के आकृति, भार एवं आयतन में वृद्धि होती है।

उत्सर्जन Excretion-जीवधारियों द्वारा शरीर में उपस्थिति हानिकारक पदार्थों का उत्सर्जन होता है।

एलैक्जेन्डर फ्लेमिंग

एलैक्जेन्डर फ्लेमिंग (1881-1955) स्टैफाइलो कोक्स नामक जीवाणु, जिसके कारण गले में संक्रमण हो जाता है, का अध्ययन कर रहे थे। वह इस जीवाणु की एगार माध्यम में पैट्रीडिश में वृद्धि कर रहे थे। ये सामान्य अवलोकन है कि इस प्रकार के संवर्धन माध्यमों पर अन्य सूक्ष्म जीव भी उग आते हैं। फ्लेमिंग ने नीले हरे कवक पैन्सिलियम नोटेटम को संवर्धन में देखा।

प्राय: संदूषित संवर्धनों को फेंक दिया जाता है, लेकिन फ्लेमिंग ने इस विशेष प्लेट को रख लिया। इस प्लेट में अन्य प्लेटों में उगी हुई संरचनाओं से कुछ भिन्नता थी, क्योंकि इस प्लेट में जीवाणुओं की वृद्धि नहीं थी। इससे यह स्पष्ट होता था कि प्लेट में मोल्ड के आस-पास जो साफ क्षेत्र बन गया था, उसमें जीवाणु की वृद्धि नहीं हुई थी।

अन्य जीवाणु विशेषज्ञों ने भी देखा कि मोल्ड जीवाणु की वृद्धि नहीं होने देते। लेकिन फ्लेमिंग ने इस पदार्थ का नाम पैन्सिलिन रखा (1928-1929)। उन्होंने बताया कि- पैन्सिलिन एक एंटीसेप्टिक दावा हो सकती है, जो पैन्सिलिन संवेदी जीवाणुओं को नष्ट करने में सक्षम है। उसके बाद परीक्षणों से पता चला कि पैन्सिलिन मनुष्य के लिये एक उपयोगी एन्टी बॉयोटिक बन गई।

द्वितीय विश्व युद्ध के समय पैन्सिलिन ने घायल हुए सैनिकों में संक्रमण रोकने में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिसके लिए इन्हें 1945 में चिकित्या का नोबेल पुरस्कार मिला।

जीव विज्ञान की विभिन्न शाखाओं के जनक

शाखा जनक शाखा जनक
जीव विज्ञान अरस्तू वनस्पति विज्ञान थियोफ्रेस्टस
जीवाश्मिकी जार्ज क्यूवियर सुजननिकी एफ. गाल्टन
आधुनिक वनस्पति विज्ञान लिनियस प्रतिरक्षा विज्ञान एडवर्ड जैनर
आनुवंशिकी ग्रेगर जॉन मण्डल आधुनिक आनुवंशिकी ग्रेगरी बेटसन
कोशिका विज्ञान रॉबर्ट हुक वनस्पति चित्रण क्रेटियस
पादप शारीरिकी एन. गिऊ जन्तु विज्ञान अरस्तू
वर्गिकी लीनियस चिकित्साशास्त्र हीप्पोक्रेटस
औतिकी मार्सेलो मैल्पीगी उत्परिवर्तन सिद्धांत के जनक ह्यूगो डी. ब्राइज
तुलनात्मक शारीरिकी जी. क्यूवियर कवक विज्ञान

माइकोली

पादप कार्ययिकी स्टीफन हेल्स जीवाणु विज्ञान ल्यूवेनहॉक
सूक्ष्म जीव विज्ञान लुई पाश्चर भारतीय कवक विज्ञान ई. जे. बुट्लर
भारतीय ब्रायोलॉजी आर. एस. कश्यप भारतीय पारिस्थितिकी आर.डी. मिश्रा
भारतीय शैवाल विज्ञान एम. ओ. ए. आयंगर आधुनिक भ्रूण विज्ञान वॉन बेयर
एण्डोक्राइनोलॉपी थॉमस ऐडिसन

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