भारत का इतिहास/Indian History

हेरोडोटस को इतिहास का पिता कहा जाता हैं। हेरोटोडस यूनानी नागरिक था। इसने एक  पुस्तक लिखा जिसका  नाम हिस्टोरिका था।
भारत के इतिहास को इसकी बिशेषता के अनुसार तीन भागो में बांटा गया  है –
1.प्रागैतिहासिक काल/पाषाण काल
2.आद्य-ऐतिहासिक काल
3.ऐतिहासिक काल
1.प्रागैतिहासिक काल =ऐसा काल जिसकी जानकारी के लिए सिर्फ पुरातात्विक साक्ष्यो पर निभर रहना पड़ता है । सबसे पहले 1863 ईसवी में रॉबर्ट ब्रूस फुट ने पल्लवरम(तमिलनाडु) से प्रागैतिहासिक खोजो की शुरुआत की। रॉबर्ट ब्रूस फुट जियोलाजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (भूगर्व विद वैज्ञानिक एवं पुरातत्व विद) से संबंधित थे।  इस लिए इन्हें भारत में प्रागैतिहासिक खोजों के जनक मन जाता हैं।
भारतीय पुरातत्व विभाग की स्थापना 1861 में लार्ड कैनिंग के समय में हुई, भारतीय पुरातत्व विभाग के प्रथम महानिदेशक अलेक्जेंडर कनिंघम थे इस लिए इन्हें भारतीय पुरातत्व विभाग के जनक कहा जाता है  वर्तमान में पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग संस्कृति मंत्रालय से संबंधित है। 2011 में इस विभाग के 150वा वर्ष हुए ।
भारत में  सबसे पुराने पाषाण उपकरण बोरी(महाराष्ट्र) से प्राप्त हुए जो लगभग 14 लाख वर्ष पूर्व  के हैं।
पुरात्तव विद थॉमसन ने कोपेनहेग (डेनमार्क) संग्रहालय की वस्तुओं के आधार पर प्रागैतिहासिक काल को तीन भागों में बांटा हैं।
1.पाषाण काल
2.कांस्य युग
3.लौह युग
पाषाण काल के तीन भाग हैं –
i) पुरा पाषाण काल
ii) मध्य पाषाण काल
iii) नव पाषाण काल
i)पुरा पाषाण काल (Paleolithic Period)
समय : 25 लाख ई. पूर्व से 10000 ई. पूर्व
लक्षण : आखेटक या शिकारी एवं खाद्य संग्राहक, पशुपालन का ज्ञान नहीं था,आग का ज्ञान था पर उपयोग का ज्ञान नहीं था, कृषि का ज्ञान भी नहीं था।
औजार : स्फटिक या क्वार्टजाइट, शल्क, ब्लेड
उपकरण (हस्त कुठार, कुल्हाड़ी,गड़ासा)
स्थल-:अतिर्पक्कम (तमिलनाडु),
हथनौरा (म.प्र.) नर्मदा घाटी – मानव खोपड़ी एवं कंकाल का पहला साक्ष्य
भीमबेटका (मध्य प्रदेश) नर्मदा घाटी – यहाँ से गुफा चित्रकारी का प्राचीन साक्ष्य मिला है, ये चित्र तीनो कालों पुरा, मध्य एवं मध्य पाषाण से सम्बंधित है
वेलां नदी घाटी मिर्ज़ापुर (उत्तर प्रदेश) यंहा से मातृदेवी की प्रतिमा प्राप्त हुई है।

  • ¡¡) मध्य पाषाण काल (Mesolithic Period)
    लाने का श्रेय 1867 में सी.एल. कार्लाइल को जाता है।
    समय : 10000  ई. पूर्व से 4000 ई. पूर्व
    लक्षण : पशुपालन की शुरुआत (पहला पशु – कुत्ता)
    औजार : माइक्रोलिथ (सूक्ष्म पाषाण उपकरण)
    स्थल:-
    बागौर (राजस्थान) एवं आदमगढ़ (मध्यप्रदेश) – पांच हजार ई. पूर्व में पशुपालन का पहला साक्ष्य
    लेखहिया इलाहबाद (उत्तर प्रदेश)-सर्वाधिक मानव कंकाल मिले
    चौपानी मांडो इलाहबाद (u.p.) – प्राचीनतम मृदभांड
    सराय नाहरराय (प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश) – युद्ध का साक्ष्य, चार नर कंकाल, स्तम्भ गर्त
    महदहा (प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश) – मृगश्रंग के छल्ले, हड्डीयो के आभूषण, स्त्री-पुरुष युगल शवाधान
    दमदमा (प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश) – तीन नर कंकाल एक साथ, पांच युगल शवाधान¡¡¡) नव पाषाण काल (Neolithic Period)
    समय : 10000 ई. पूर्व से 1000 ई. पूर्व
    लक्षण : कृषि की शुरुआत (फसल – पहला जौ, गेहूं, चावल, मक्का)
    स्थायी जीवन की शुरुआत एवं आग के उपयोग की भी सीखा, कुम्हारी का ज्ञान, पहिये
    औजार : स्लेट पत्थर के औजार
    स्थल:-
    मेहरगढ़ बलुचिस्तान(pak)- 7000 ई. पू. कृषि का साक्ष्य, सर्वप्रथम पालतू भैंस।
    लाहुरादेव संतकरवी (उत्तर प्रदेश) 8000 ई. पू. कृषि एवं चावल के साक्ष्य
    चिराद सासाराम (बिहार) हड्डियों के उपकरणआद्य-ऐतिहासिक काल (Proto-History Period)आद्य-ऐतिहासिक काल ऐसे काल को कहते है जिसमे पुरातत्विक साक्ष्य के साथ-साथ लिखित साक्ष्य भी प्राप्त हुए है किंतु इन्हें अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है
    जैसे – सिंधु घाटी सभ्यता ।
    समय:-3000-600 ई. पू.सिंधु सभ्यता या हड़प्पा सभ्यता (Indus/Harappan Civilization)अन्य नाम :- सिंधु घाटी सभ्यता, सरस्वती सभ्यता, कांस्य युगीन सभ्यता, हड़प्पा सभ्यता आदि।
    सर्वाधिक उपयुक्त “हड़प्पा सभ्यता” क्यूंकि सबसे पहले इसी स्थान को खोजा गया था इस लिए इसके नाम पर इस सभ्यता का नाम पड़ा ।

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