3. उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा (High-Level Programming Language)

  1. उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा (High-Level Programming Language)

यह मनुष्‍य द्वारा समझने में बहुत आसान होती है इसमें साधारण अंग्रेजी के शब्‍दों का प्रयोग किया जाता है तथा बाद में कम्पाइलर का प्रयोग कर मशीनी भाषा (Machine Language) में बदला जाता है.

शुरूआती दौर की प्रोग्रामिंग भाषा बहुत कठिन थी इस भाषा को केवल कंप्‍यूटर ही समझ सकता है इसे मशीनी भाषा कहते हैं, पहली पीढ़ी के कंप्‍यूटर  में  मशीनी भाषा (Machine language) का प्रयोग किया जाता था। मनुष्‍‍‍य के लिये इस भाषा में प्राेग्राम लिखना असंभव था, इसके बाद विकास हुआ असेम्बली भाषा (Assembly Language) का जिसमे अंकीय संकेतो के स्थान पर नेमोनिक कोड का प्रयोग किया जाता है और इसे मशीनी भाषा में बदलने के लिये असेम्बलर की आवश्‍यकता होती है, किन्तु यह अलग-अलग माइक्रोप्रोसेसर के लिये अलग-अलग होती है। ये दोनाें निम्न स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा ( Low Level Programming language) कहलाती हैं

इसके बाद विकास हुआ उच्च स्तरीय भाषा (High level language) का यह अधिक सुविधाजनक थी यह भाषा अंग्रेजी भाषा के कोड जैसी होती है, इसलिए इसे कोड करना या समझना बहुत सरल होता है इसको कम्पाइलर का प्रयोग कर मशीनी भाषा (Machine Language) में बदला जाता है यह दो प्रकार की होती है –

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मॉनिटर क्या है – What is Monitor in Hindi

सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU)

मशीनी भाषा (Machine Language) (CPU)

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तीसरी पीढ़ी की प्रोग्रामिंग भाषा (Third generation programming language) – इस प्रोगामिंग भाषा के आने से कंप्‍यूटर प्रोग्रामर का काम आसान हो गया कंप्‍यूटर प्रोग्रामिंग करते समय अब उनको मशीनी भाषा (Machine Language) और असेम्बली भाषा (Assembly language) की जरूरत नहींं थी और ना ही उनको मशीन के Architecture को जानना जरूरी था वह अब आजाद होकर कंप्‍यूटर प्रोग्रामिंग कर सकते थे तीसरी पीढ़ी की प्रोग्रामिंग भाषा (Third generation programming language) में पास्कल और बेसिक का विकास हुआ

चौथी पीढ़ी की प्रोग्रामिंग भाषा (Fourth generation programming language) – तीसरी पीढ़ी की प्रोग्रामिंग भाषा के मुकाबले चौथी पीढ़ी की प्रोग्रामिंग भाषा को अधिक सरल बनाया गया, इस भाषा में कोडिंग करना उसे समझना बहुत सरल हो गया इसी समय C, C++ भाषा का विकास हुआ, जिससे प्रोग्रामिंग करना अधिक सरल हुआ।

 

उच्च स्तरीय भाषा काम कैसे करती है

जैसा की हम अपनी पिछली पोस्ट में बता चुके हैं कि इस तरह से इंसान को आपस में बातचीत करने के लिए किसी भाषा का सहारा लेना पड़ता है उसी तरह से कंप्यूटर एक मशीन है और इसकी भी अपनी एक भाषा है जिसे हम मशीनी भाषा कहते हैं कंप्यूटर से कार्य करवाने के लिए हमें उसी की भाषा में बात करनी होगी मशीनी भाषा बहुत आने के कारण उसे समझना बहुत ही मुश्किल हो जाता है इसलिए हम एक अनुवादक का प्रयोग करें जो हमें कंप्यूटर से करवाने में हमारी सहायता करता है हम हाई लेवल लैंग्वेज अपना कोड लिखते हैं और अनुवादक (जिसे हम कंपाइलर या इंटरप्रेटर भी कहते हैं) हमारे लिखे कोड को मशीनी भाषा में बदल देता है और कार्य करने के उपरांत हमें परिणाम हमारी भाषा में ही देता है। हाई लेवल लैंग्वेज में बनाया गया प्रोग्राम ज्यादातर किसी भी कंप्यूटर पर चलाया जा सकता है अर्थात किसी हार्डवेयर पर निर्भरता कम होने के कारण यह बहुत ज्यादा उपयोग होती है।

उच्च स्तरीय भाषायों के उदाहरण हैं जैसे बेसिक (BASIC), फॉरटरैन (FORTRAN), कोबोल (COBOL), पास्कल (PASCAL), सी (C), सी++ (C++), जावा (JAVA), VISUAL BASIC, Visual Basic.net, इत्यादि।

सोर्स कोड और ऑब्जेक्ट कोड क्या होता है

हाई लेवल लैंग्वेज में हम जो भी कोड लिखते हैं उसे सोर्स कोड कहते हैं और अनुवादक या कंपाइलर हमारे सोर्स कोड को जब मशीनी भाषा में बदल देता है उसे ऑब्जेक्ट कोड कहते हैं।

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