1. मशीनी भाषा (Machine Language) –

मानव द्वारा समझने के स्‍तर (कठिन से सरल) के आधार पर प्रोग्रामिंग भाषा को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है –

  1. मशीनी भाषा (Machine Language) –

Computer की most basic language को low-level computer language या machine language भी कहते है जो की केवल binary (‘1’ and ‘0’) code को समझती है लेकिन ये बहुत complex होती है जबकि high-level languages (जिसका example हमने ऊपर दिया – software for school) use करने मे बहुत easy होती है | Low language को machine code मे convert करने के लिए एक दूसरे program जिसको की compiler or interpreter कहते है की जरुरत नहीं होती |

लेकिन मशीनी भाषा में तैयार करना बहुत कठिन है इसके दो कारण हैं –

  1. मशीनी भाषा ( Machine language ) मेंं प्रोग्राम लिखने के लिये प्रोग्रामर को मशीनी निर्देशो या तो अनेकों संकेत संख्या के रूप मे याद करना पडता था और साथ ही प्रोग्रामर को कंप्यूटर के Hardware Structure के बारे मे सम्पूर्ण जानकारी भी होनी चाहिये थी
  2. मशीनी भाषा ( Machine language ) में प्रोग्राम सुरक्षित रखने के लिये पंचकार्ड (Punch Cards) का इस्‍तेमाल किया जाता था, 1801 में जोसेफ-मेरी जैकर्ड ने सर्वप्रथम पंच कार्ड का प्रयोग किया.

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मशीनी भाषा में तैयार प्रोग्राम

चूंकि मशीनी भाषा में किसी भी प्रोग्राम को लिखना बहुत कठिन है, अगर आपको मशीनी भाषा में यानि बायनरी में लिखना हो – Welcome to Sarkar Study Waves Education

तो आपको यह मशीनी भाषा ( Machine language ) में कुछ ऐसा लिखना होगा –

01001001 00100000 01001100 01001111 01010110 01000101 00100000 01001101 01011001 01000010 01001001 01000111 01000111 01010101 01001001 01000100 01000101 00101110 01000011 01001111 01001101

चूंकि मशीनी भाषा मे मात्र दो अंको 0 और 1 की श्रृंखला का प्रयोग होता है। अत: इसमे त्रुटि होने की सम्भावना अत्यधिक है। और प्रोग्राम मे त्रुटि होने पर त्रुटि को तलाश कर पाना बहुत कठिन है इस कारण वर्तमान में मशीनी भाषा में प्रोग्राम नहीं लिखे जाते हैं.

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