देश में बड़े-बड़े नौ अकाल

ब्रिटिश राज्यकाल के पहले के अकालों का विश्वस्त विवरण प्राप्त नहीं होता है लेकिन 1757 ई. की प्लासी की लड़ाई और 1947 ई. में भारत की स्वाधीनता मिलने के समय के बीच, अर्थात् 190 वर्ष की छोटी अवधि के दौरान देश में बड़े-बड़े नौ अकाल पड़े। Note : इतिहास में सबसे भयंकर था बंगाल का अकाल (सन 1942-43) जिसमें 15 लाख व्यक्ति मरे।1769-70 ई., जिसमें बंगाल, बिहार और उड़ीसा की एक तिहाई आबादी नष्ट हो गई।   1837-38 ई. में समस्त उत्तरी भारत अकालग्रस्त हुआ, जिसमें 8 लाख व्यक्ति मौत…

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तीनकठिया खेती, चम्पारण सत्याग्रह -भारतीय स्वतंत्रता इतिहास में गाँधीजी के सत्याग्रह का यह पहला प्रयोग

तीनकठिया खेती – तीनकठिया खेती अंग्रेज मालिकों द्वारा बिहार के चंपारण जिले के रैयतों (किसानों) पर नील की खेती के लिए जबरन लागू तीन तरीकों मे एक था। खेती का अन्य दो तरीका ‘कुरतौली’ और ‘कुश्की’ कहलाता था। तीनकठिया खेती में प्रति बीघा (२० कट्ठा) तीन कट्ठा जोत पर नील की खेती करना अनिवार्य बनाया गया था। 1860 के आसपास नीलहे फैक्ट्री मालिक द्वारा नील की खेती के लिए ५ कट्ठा खेत तय किया गया था जो 1867 तक तीन कट्ठा या तीनकठिया तरीके में बदल गया। इस प्रकार फसल…

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रैयतवाड़ी व्यवस्था और महालवाड़ी व्यवस्था

रैयतवाड़ी व्यवस्था व्यवस्था में प्रत्येक पंजीकृत भूमिदार भूमि का स्वामी होता था, जो सरकार को लगान देने के लिए उत्तरदायी होता था। भूमिदार के पास भूमि को रहने, रखने व बेचने का अधिकार होता था। -भूमि कर न देने की स्थिति में भूमिदार को, भूस्वामित्व के अधिकार से वंचित होना पड़ता था। -इस व्यवस्था के अंतर्गत सरकार का रैयत से सीधा सम्पर्क होता था। –रैयतवाड़ी व्यवस्था को मद्रास तथा बम्बई (वर्तमान मुम्बई) एवं असम के अधिकांश भागों में लागू किया गया। –रैयतवाड़ी भूमि कर व्यवस्था को पहली बार 1792 ई.…

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स्थाई बन्दोबस्त (Permanent Settlement) या ज़मींदारी प्रथा, इस व्यवस्था को जागीरदारी, मालगुज़ारी व बीसवेदारी क्या है?

स्थाई बन्दोबस्त (Permanent Settlement) या ज़मींदारी प्रथा, इस व्यवस्था को जागीरदारी, मालगुज़ारी व बीसवेदारी के नाम से भी जाना जाता था। इस व्यवस्था के लागू किए जाने से पूर्व ब्रिटिश सरकार के समक्ष यह समस्या थी कि भारत में कृषि योग्य भूमि का मालिक किसे माना जाए, सरकार राजस्व चुकाने के लिए अन्तिम रूप से किसे उत्तरदायी बनाये तथा उपज में से सरकार का हिस्सा कितना हो। लॉर्ड कार्नवालिस का शासनकाल अपने प्रशानिक सुधारों के लिए हमेशा याद किया जायेगा. उसने साम्राज्य विस्तार की और अधिक ध्यान न देकर आंतरिक सुधारों…

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दादाभाई नौरोजी का धन-निष्कासन का सिद्धांत : Theory of Drain of Wealth

Note – दादाभाई नौरोजी ने इसे “अंग्रेजों द्वारा भारत का रक्त चूसने” की संज्ञा दी. दादाभाई नौरोजी 1850 में एलफिन्स्टन संस्थान में प्रोफेसर और ब्रिटिश सांसद बनने वाले पहले भारतीय थे। वे ‘ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ इंडिया’ और ‘भारतीय राष्ट्रवाद के पिता’ के महान व्यक्तित्व से पहचाने जाते थे। वह एक शिक्षक, कपास व्यापारी और सामाजिक नेता थे। वह दादाभाई नौरोजी ही थे जिनका जन्म 4 सितंबर 1825 को मुंबई के खड़क में हुआ था। वह 1892 और 1895 के बीच यूनाइटेड किंगडम हाउस ऑफ कॉमन्स में संसद सदस्य (एमपी)…

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