ख़िलजी वंश (1290-1320 ई.)- जलालुद्दीन ख़िलजी (1290-1296 ई.)

ख़िलजी या ख़लजी वंश (1290-1320 ई.) दिल्ली की मुस्लिम सल्तनत का दूसरा शासक परिवार था। इस वंश की स्थापना जलालुद्दीन ख़िलजी ने की थी, जिसने अपना जीवन एक सैनिक के रूप में प्रारम्भ किया था। हालांकि ख़िलजी क़बीला लंबे समय से अफ़ग़ानिस्तान में बसा हुआ था, लेकिन अपने पूर्ववर्ती ग़ुलाम वंश की तरह यह राजवंश भी मूलत: तुर्किस्तान का था। इसके तीन शासक अपनी निष्ठाहीनता, निर्दयता और दक्षिण भारत में हिन्दू राज्यों पर अधिकार के लिए जाने जाते थे। ख़िलजी वंश का प्रथम सुल्तान जलालुद्दीन ख़िलजी, ग़ुलाम वंश के अंतिम…

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दिल्ली सल्‍तनत- बलबन(1265-87)

बलबन इल्बरी तुर्क था तथा इल्तुतमिश का दास था. वह चहलगानी अर्थात चालीसा अमीरों के दल का हिस्सा था, इल्तुतमिश ने इसे खासदार नियुक्त किया था. बलबन को रेवाड़ी की जागीर प्रदान की गई थी तथा यह हांसी अर्थात हरियाणा का इक्‍तादार भी रहा था. कालांतर में इसे नागौर की इक्‍ता प्रदान की गई, इसने सुल्तान मसूद शाह के विरुद्ध षड्यंत्र में हिस्सा लेकर नसीरुद्दीन महमूद को सुल्तान बनवाया था, नासिरुद्दीन महमूद के काल में बलवान नायब ए मुमलकात बना और उसने सारे अधिकार अपने हाथ में केंद्रित कर लिए.…

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दिल्ली सल्तनत- रजिया (1236 to 1240)

रजिया का शासक बनना मध्ययुग की एक अत्यंत आश्चर्यजनक घटना थी और उसको सत्ता प्राप्त होने का मुख्य कारण इल्तुतमिश द्वारा उसे उत्तराधिकारी नामित करना और जनसमर्थन था, जनसमर्थन के कारण ही रजिया शाह तुर्कान के पुत्र रुकनुद्दीन फिरोज शाह को अपदस्थ कर के गद्दी पा सकी. रजिया ने न्याय के सूचक लाल वस्त्र पहनकर जनता से शाह तुर्कान के विरुद्ध सहायता मांगी थी। मध्यकालीन भारत का इतिहास में यह पहला मौका था जब उत्तराधिकार के प्रश्न पर जनता ने किसी महिला सुल्तान को चुना था. इल्तुतमिश की योग्यतम संतान…

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दिल्ली सल्तनत- इल्तुतमिश (1210-1236)

कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु के बाद आरामशाह दिल्ली सल्तनत का शासक बना परंतु बदायूं का इक्‍तादार इल्तुतमिश आरामशाह को अपदस्थ कर सुल्तान बना. इल्तुतमिश को गजनी के शासक यल्‍दूज से दास्‍य मुक्ति पत्र प्राप्त हुआ. इसने दिल्ली को राजनीतिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक केंद्र बनाया तथा सल्तनत को सुदृढंता और स्थायित्व प्रदान किया, यही कारण है कि इसको दिल्ली सल्तनत का वास्तविक संस्थापक कहा जाता है. प्रारंभिक समस्याएं और समाधान इल्तुतमिश ने अपने विरोधियों यल्‍दूज एवं कुबाचा को पराजित किया. मंगोल शासक चंगेज के आक्रमण को अपनी सूझबूझ से टाल दिया…

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कुतुबुद्दीन ऐबक-1206 से 1210

गुलाम वंश- 1206 से 1290 दिल्‍ली सल्तनत पर शासन करने वाले प्रारंभिक सुल्‍तान गुलाम वंश के थे। इसे गुलाम वंश कहने का प्रमुख तर्क यह है कि इस वंश के श्रेष्‍ठ तीन शासक- कुतुबुद्दीन ऐबक, इल्‍तुतमिश और बलबन. इसे मामलूक वंश या दास वंश भी कहा जाता है। कुतुबुद्दीन ऐबक 1206 ईस्वी में मोहम्मद गौरी की मृत्यु के बाद उसका दास और भारतीय क्षेत्रों का उसका प्रतिनिधि ‘वली अहद’ कुतुबुद्दीन ऐबक लाहौर में शासन पर आसीन हुआ तथा उसने लाहौर को ही राजधानी बनाए रखा. इसे तुर्क सरदारों ने सत्ता…

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मुहम्मद बिन क़ासिम

सिंध पर आक्रमण हर्ष की मृत्‍यु के पश्‍चात उत्‍तरी भारत की एकता खण्डित हो गई। शक्तिशाली राज्‍य- छोटे-छोटे राज्‍य में- आपसी प्रतिद्वंदिता में उलझ गए- विदेशी आक्रमण का आकलन नहीं- अरबों ने इसका फायदा उठाया- सबसे पहले अरबों से 637ई. में आक्रमण- असफल रहा. अरबों का सफलता तब मिली जब मुहम्‍मद बिन कासिम ने सिंध पर आक्रमण किया। उस समय दाहिर का शासन था। वह आंतरिक संघर्ष में उलझा हुआ था इसलिए आक्रमण को रोकने में असफल रहा। मुहम्‍मद बिन कासिम का सिंध पर आक्रमण भारतीय क्षेत्रों पर अरबों का…

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